डेल्टा प्लस इंतज़ार कर रहा है..सावधानी हटी कि दुर्घटना घटी

नहीं, मैं आपको डराना नहीं चाहता. न ही मैं कोई सनसनीखेज हेडलाइन से चौंकाना चाहता हूँ. मैं कोई अनावश्यक दहशत का माहौल भी नहीं बनाना चाहता.

आप चाहें तो राहत की सांस ले सकते हैं.

आखिर कोरोना की दूसरी और कहीं ज्यादा घातक लहर अब उतार पर है. कुछ इलाकों को छोड़कर देश के ज्यादा हिस्सों में हालात पहले से बेहतर हुए हैं. कोरोना का संक्रमण घटा है और अस्पतालों में भर्ती मरीजों की संख्या भी काफी कम हुई है.

देश में अधिकांश राज्यों में बाज़ार खुलने लगे हैं, माल्स खुल गए हैं, रेस्तरां भी खुल गए हैं. पर्यटन केंद्र खुलने लगे हैं. मेट्रो चलने लगी है. बसें और ट्रेनें चल रही हैं. इसके साथ ही बाजारों, माल्स और रेस्तरां में चहल-पहल और भीड़ बढ़ने लगी है.

कई जगहों पर तो ऐसी भीड़ उमड़ रही है, जैसे पिछले महीने कुछ हुआ ही नहीं हो. एक बार फिर लोग बेचैन और बेकाबू हो रहे हैं. इसके साथ ही कोरोना से बचाव के लिए जरूरी सावधानियां भी पीछे छूटने लगी है. लापरवाही बढ़ रही है.

बाजारों, सार्वजनिक जगहों, दफ्तरों, मेट्रो और बसों में एक बार फिर आधा-अधूरा या नाक के नीचे लटकता, ढीला-ढाला सिर्फ दिखाने के लिए मास्क लगाए और एक-दूसरे से कंधे रगड़ते लोगों की भीड़ दिखने लगी है.

लेकिन ठहरिए!

हम-आप-वे-सब एक बार फिर महामारियों का सबक भूल रहे हैं. यही गलती फ़रवरी-मार्च में हुई और उसका नतीजा दूसरी लहर के रूप में सामने आया. उसकी देश और लोगों ने भारी कीमत चुकाई.

उस समय भी फ़रवरी में मैंने यही नई राह ब्लॉग पर एक लम्बा लेख लिखकर चेताया था कि हम कुछ जल्दी जश्न मना रहे हैं.

इस बार भी हालात सुधरने के बावजूद चिंता के कई कारण हैं.

यह ठीक है कि कोरोना से मौतें भी पहले की तुलना में लगभग एक चौथाई रह गई हैं लेकिन उनकी संख्या अभी भी चिंतित करनेवाली हैं.

चिंतित करनेवाली और भी कई बातें हैं.

पहली बात यह है कि देश में अभी भी हर दिन कोरोना संक्रमण के लगभग 50 हजार से अधिक मामले आ रहे हैं. यही नहीं, इस समय देश में कोरोना के सक्रिय या एक्टिव मामले छह लाख से ज्यादा हैं. कुछ राज्यों में एक सप्ताह के अन्दर ही संक्रमण के मामलों में मामूली ही सही लेकिन बढ़ोत्तरी हुई है.

मतलब कि कोरोना खत्म नहीं हुआ है. वह हमारे बीच ही मौके के इंतजार में बैठा है. याद रखिये कि महामारी विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों ने तीसरी लहर आने की चेतावनी दे रखी है.

लेकिन तीसरी लहर का आना कोई अनिवार्य नहीं है. वह जब भी आएगी, हमारी लापरवाही, मूर्खताओं, अति-आत्मविश्वास और जल्दबाजी से आएगी.

दूसरी चिंता की बात यह है कि दूसरी लहर के लिए जिम्मेदार कोरोना का डेल्टा वर्जन एक बार फिर म्यूटेट कर चुका है. इसे डेल्टा प्लस कहा जा रहा है. अभी इसके बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है. लेकिन देश के कुछ हिस्सों में इसके मामले मिले हैं. इसमें बीटा वर्जन के कुछ लक्षण दिखे हैं जिससे वैज्ञानिक इसे लेकर चिंतित हैं.

यह आशंका भी जाहिर की जा रही है कि डेल्टा प्लस वैक्सीन या इम्यून को भी झांसा दे सकता है. इसलिए इसे सरकार ने वी.ओ.सी यानी वैरिएंट आफ कंसर्न घोषित किया है. यह चिंतित करनेवाला वैरिएंट है. इस कारण सरकार और उसकी एजेंसियों के साथ लोगों को भी हाई एलर्ट पर रहना होगा.

तीसरी चिंता की बात यह है कि इस सप्ताह से टीकाकरण कार्यक्रम में कुछ तेजी आने के बावजूद उसकी रफ़्तार पहले दिन के रिकार्ड को जारी नहीं रख पा रही है. टीकाकरण की मौजूदा रफ़्तार के साथ साल के आखिर तक न्यूनतम 60 करोड़ लोगों को टीके की दोनों खुराक देने का लक्ष्य हासिल करना मुश्किल दिख रहा है.

इसलिए सावधानी के अलावा कोई चारा नहीं है. यही नहीं, विशेषज्ञों का तो कहना है कि टीकाकरण के बाद भी सावधानी में कमी नहीं आनी चाहिए.

डा. रणदीप गुलेरिया, निदेशक, एम्स (फोटो सौजन्य: एनडीटीवी)

चौथी और कहीं बड़ी चिंता की बात यह है कि कोरोना महामारी की तीसरी लहर के बारे में किसी को कोई अंदाज़ा नहीं है. उसकी टाइमिंग या स्वरुप को लेकर कुछ स्पष्टता नहीं है. एम्स के निदेशक ने एनडीटीवी से बातचीत में चेतावनी दी है कि जिस तरह से अनलाक के बाद लोग घरों से निकले हैं, भीड़भाड़ बढ़ रही है और लोग सावधानी नहीं बरत रहे हैं, उसमें अगले छह से आठ सप्ताहों में तीसरी लहर आ सकती है.

तीसरी लहर की व्यापकता और भयावहता के बारे में भी अभी कोई अनुमान नहीं है. दूसरी लहर की भयावहता को देखते हुए यह आशंका जाहिर की जा रही है कि तीसरी लहर और ज्यादा व्यापक और घातक होगी. टाइम्स आफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, महाराष्ट्र तीसरी लहर की तैयारी कर रहा है जिसमें उसका अनुमान के 50 लाख से ज्यादा मामले आ सकते हैं.

द हिन्दू की एक रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली सरकार तीसरी लहर में हर दिन कोरोना के 37 हजार से 45 हजार मामले आने की आशंका को ध्यान में रखकर तैयारी कर रही है. साफ़ है कि कोरोना की तीसरी लहर की आशंका से कोई इनकार नहीं कर रहा है.

ऐसे में, अभी जश्न मनाने का समय नहीं आया है. अभी धैर्य, सतर्कता और सावधानी रखना होगा. अपने सार्वजनिक व्यवहार में कुछ स्थायी बदलाव लाने होंगे.

सीधी सी बात यह है कि हमें महामारी के साथ ही जीने की आदत डालनी होगी. यह हम जितनी जल्दी समझ और सीख जाएंगे, उतना ही तीसरी लहर को रोकने में कामयाब होंगे.

हमें ध्यान रखना होगा कि हम जब भी बाहर निकलें, डबल मास्क जो नाक-मुंह को सख्ती से ढंके के साथ निकलें. भीड़-भाड़ की जगहों पर जाने से बचें. बंद कमरों या जगहों में ज्यादा लोगों के साथ लम्बे समय तक न बैठें. टीका जरूर लगवाएं. हाथ साबुन से धोते रहें. साफ़-सुथरा और पौष्टिक खाना खाएं.

क्या इन चीजों का ध्यान रखना इतना मुश्किल है?

याद रहे कि डेल्टा और डेल्टा प्लस मौके के इंतजार में हैं.

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Anand Pradhan

देश-समाज की राजनीति, अर्थतंत्र और मीडिया का अध्येता और टिप्पणीकार